Zinda hun main.'s image
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नहीं हुई कोई बात, 

कई रोजों से उससे, 

नहीं लग रहा, 

कुछ रोजों से जिंदा हूं मैं. 


उम्मीदें सबको हैं, 

मुझसे उड़ने की, 

रात अंधेरी में एक फंसा,

परिंदा हूं मैं.


एक कलम ही है बस, 

जिसका, मेरा संग है, 

कब्र और कागज का ही,

बाशिंदा हूं मैं.


नहीं लग रहा, 

कुछ रोजों से जिंदा हूं मैं.

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