स्वपन हम दोनों ने ही सजाए थे
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स्वपन हम दोनों ने ही सजाए थे पर स्वप्न सारे पूरे तुम्हारे ही हुए!

Abhay DixitAbhay Dixit February 13, 2022
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स्वपन हम दोनों ने ही सजाए थे,
पर स्वप्न सारे पूरे तुम्हारे ही हुए,
मंजिल पर पहुँचना हम दोनों को ही था,
पर न जाने क्यों रास्ते में हम ही अधूरे हुए।

तुम्हें तो साथ की जरुरत थी सफर के लिए,
हमें छोड़कर भी तुम्हारे कई साथी हुए,
हमें तो बस तुम्हारी ही आरजू रही सदा,
तुमने छोड़ा तो हम किसी के न हुए।

हमें सदा से ख्वाहिश एक ही रहीं,
तुम्हारे संग स्वर्ग तक जाएँ,
 इतने काबिल हैं की स्वर्ग तो मिल ही जाता,
तुम्हें पा सकें इतने कभी काबिल न हुए,

ये गीत ये गजले सब तुम्हारी ही देन हैं,
हम तो इन्हें लिखकर मोम से कबके पत्थर हुए,
चाह थी की तुम्हें पाने वो युद्ध हो गया,
हार गए तुमसे फिर भी खुद से हारे हुए न हुए।।
~अभय दीक्षित

#प्रेम

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