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बंद मुट्ठी बंदही रहने दो

Abasaheb MhaskeAbasaheb Mhaske February 19, 2022
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बंद मुट्ठी बंदही रहने दो

अच्छा हैं दफन हैं वो सब राज

कमसे कम सुकून तो हैं आज

लोग कहते हैं कहने दो लोगो का क्या ?

 

क्या भरोसा किसीका कब धोखा दे

अपना समझे वही धोका देते हैं अक्सर

वो नासमझ हैं , उसे जीना नहीं आता

लोग कहते हैं कहने दो लोगो का क्या ?

 

दोस्त तो बेशक , कल रहे ना रहे

चलो अच्छा हैं उम्मीदपर हैं जिंदगी

टीकी हुई कल किसने देखा हैं

लोग कहते हैं कहने दो लोगो का क्या ?

 

पसीने की हर बून्द से भाग्य अपना जो लिखे

हिम्मत , मेहनत और लगन से बेशक

वही सुनहरे पल पाता हैं इतिहास गवाह हैं

लोग कहते हैं कहने दो लोगो का क्या ?

 

कल क्या होगा किसने हैं जाना अब तक

बस चलते हैं रहना मंजिल की तलाश में

थके ना दिल कभी , ना बिके जमीर

लोग कहते हैं कहने दो लोगो का क्या ?

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