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अंतिम युद्ध

vikas bansalvikas bansal August 29, 2022
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माना रहा श्रणिक भ्रमित, पथ विचलित मैं , ओझल मेरा ताप रहा 
 पर शक्तियों को जो सदा सुला सके, कहो कोन ऐसा श्राप रहा
भाग्य स्मृतियों का तो लौट आना ही रहा, जब धर्म परम निभाना रहा |

कहो वचन बध्ता , मन की श्रद्धा कब हारी हैं
धर ध्यान धरा का, माँ का, लड़ जाना ही वीरों का काम रहा |

कर तिलक चंदन सी माटी का, पहन केसरिया उद्दवलित बलिदान को 
गाथा जिनकी चित्तोड गाता, उनको शत शत नमन करता मन सदा अनुयायी मेरा रहा 
क्यों हो लालसा जीवन की मुझे, म्रत्यु की अमरता पर सदा मेरा अखण्ड विश्वास रहा |

है अन्तिम युद्ध ये, फिर उसी तरह से लड़ना होगा 
प्रथम कर विनाश विकार का शस्त्र अस्त्र का संधान करना होगा
चिर सीना काले बादल का, सूरज को फिर ला धरा पर रखना होगा |

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