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कविशाला – Kavishala | The School Of Poets

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Recent Poetry

कुछ अपनी बाते | Ghazal

कुछ अपनी बाते बताने आया हूँ, सुनो! मैं तुमको ही सुनाने आया हूँ।। सुना है बहुत से गीत लिखे हैं तुमने, उन्ही में से एक गीत गुनगुनाने आया हूँ।। तुम बड़ी ख़राब हो, सब...

Written By Karan Sahar, Kavishala | Your Feedback

इतना सा वर

इतना सा वर   प्रभु मेरे एक दर्शन वांछनीय है लख कर प्रभु का सौंदर्य मेरे नयन तृप्त हो जाऐंगे मेरी श्रद्धा अगर दो बूंद अश्रु बन गई हो तो दर्शन दो या अश्रु...

Written By Kavishala | Your Feedback

विरासत

आज विरासत देख रहे हैं, क्या छोड़ा तुमने, सारा जीवन रगड़ रगड़ कर , क्या जोड़ा तुमने | तुमने सारा जीवन कितनी बाँधी गिरहें , चुन चुन कर सारी खोल रहे हैं, और तुम्हारी...

Written By Ajay Chandel | Your Feedback

चलो कुछ में अब भी इंसान बाक़ी है

कुछ परिंदों ने आसमानो को छुआ है चलो कुछ में अब भी उड़ान बाकी है आँखों मे ख़ाब और सीने में बैचेनी है चलो कुछ में अब भी अरमान बाकी है कुछ लड़ रहे...

Written By Abhishek Mandloi | Your Feedback

गूँजते थे शोर में तो लफ़्ज़ बस इंकार के

हो गए कई रोज़ उलझे अब तो एक तकरार हो कम से कम दिल से उनके ख़त्म कोई ग़ुबार हो गूँजते थे शोर में तो लफ़्ज़ बस इंकार के जो थमे एक पल भी...

Written By Ashish Saxena | Your Feedback

एक किरण बस भोर की

रात बोझल सी क्यूँ बैठी? दिन ही है आ जाएगा एक किरण बस भोर की और फिर प्रकाश छा जाएगा आग है मसान की ये, जल्द ही बुझ जाएगी ज्योत नवजीवन की फिर से...

Written By Ashish Saxena | Your Feedback

मज़ा आता है । Ghazal

हमें तो मुहब्बत ही में मज़ा आता है, अब कहाँ ज़िन्दगी में मज़ा आता है । आदत छूट गई तेरी गोद में पड़े रहने की, अब तो तेरी बेरुखी में मज़ा आता है ।...

Written By Karan Sahar, Kavishala | Your Feedback

बस खा गए धोखा

मुझे लगता था जो दिल है, वहीं बस खा गये धोखा ये तेरे ग़म की महफ़िल है, यहीं बस खा गये धोखा जो कहते थे ये तेरा है, वो अब हैं कहाँ जाने मेरा...

Written By Ashish Saxena | Your Feedback

एल्बम

छण छण गतिमान जिंदगी का पहिया उस पहिये को यादो के रूप में समेट के रखती है चाहे अच्छा लम्हा हो या कि हो कोई बुरी याद कभी किसी में भेद नही कभी हमको...

Written By Akib Javed | Your Feedback

कुछ यादें – कुछ सपने

 ” बस वही यादें “ यादें एक सरल शब्द है, केवल जहन की बातें या तकलीफें हैं यादें, कुछ बातें, कुछ मुलाकातें और फिर यादें | मिलना और मिल के बिछड़ना , तस्वीरें देख...

Written By Sachin Om Gupta | Your Feedback

यूँ तेरी जुल्फ़े निहारी जा रही है

मेरे हर सोच में तेरा शय शामिल किस्मत हमारी सँवारी जा रही हैं जिंदगी हो गयी हैं रंगमंच की तरह जैसी भी हो अब गुज़ारी जा रही हैं वो सर्द रात और तेरा अहसास...

Written By Akib Javed | Your Feedback

कोई बताये कि कैसे बितायें रातें हम अपनी

कोई बताये कि कैसे बितायें रातें हम अपनी घूमने गया है कहीं चाँद मेरे शहर का उफ़ान पर है संमदर देख स्याहा काली रात घुसने को है पानी घर में उँची उँची लहर का...

Written By Vikas Bansal | Your Feedback

लौहपथगामिनी

वह चलती साँप सी सारा रास्ता नापती रेंगती बलखाती हुई हर मंजिल पीछे छोड़ जाती हुई हवाओं में छोड़ा धुआँ छुक-छुक सा फिर स्वर हुआ   वह चलती सरिता समान शहर, गाँव या हो...

Written By नीतू सिंह रेणुका | Your Feedback

ज़िंदा रहेने में

जीने में……. और ज़िंदा रहेने में बहुत फ़र्क़ है भाई ! साँसों के चलने को जीना समझ लेते हैं और चलते रहते हैं अपने ही शरीर का बोझ उठाकर ज़रूरी नहीं कि जलाया नहीं...

Written By Sundeep Agarwal | Your Feedback

धूप

कुछ धूप इक्कठा करके रख रखी है मैंने, हाँ, वही धूप जो हमने साथ चुराई थी हाँ, वही धूप जो गुजरती थी जब तुम्हारे तन से होकर तो मुझको भी तपाती थी हाँ, वही...

Written By Bhupesh Dixit | Your Feedback


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