The School Of Poets

Poetry Of The Week

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Recent Poetry

रेखाएं..

आदतन… अपना भविष्य मैं अपने हाथों की रेखाओं में ट्टोलता हूँ। ‘कहीं कुछ छुपा हुआ है’- सा चमत्कार, एक छोटे बादल जैसा हमेशा मेरे साथ चलता है। तेज़ धूप में इस बादल से हमें...

Written By Manav Kaul | Your Feedback

ख्वाहिश…

न पहचान पाओ जो धड़कन हमारी तो हमको न अपनी ख्वाहिश बताना… सांसों से साँसें मिलें जब हमारी पलट के ना तब तुम पलकें झुकाना… मुकम्मल हैं सजदे वफ़ा में हमारी दरिया को ना...

Written By Amit Kumar Verma | Your Feedback

मैं जी उठा हूँ

अंजाने इस लिबास में, रह-रह के यूँ लिहाज़ मैं, अब मैं थक चूका हूँ | सवालों के जवाब से, सपने देख-देख के हिसाब से, अब मैं पक चूका हूँ | इस अंधियारे से दूर...

Written By Kavishala | Your Feedback

एक ज्वार

खून तो मेरा भी उबल रहा है कइयों की तरह गुस्सा भी आता है विचार आते हैं एक से एक क्रांतिकारी सोचता हूँ कि अब उठना होगा युवाओं को तब ही निकलेगा हल, तमाम...

Written By Kavishala | Your Feedback

जरूरतें

जरूरतें इंसान को कमजोर बना देती हैं, जरूरतें इंसान को मजबूत बना देती हैं, अगर इंसान जरूरतों पे सही से काबू ना पा सका तो, जरूरतें किसी इंसान को राजा और किसी को फकीर...

Written By Nitin Pathak | Your Feedback

मुझे मालूम है कि तू मुझे चाहता है

मुझे मालूम है कि तू मुझे चाहता है पर तू हमेशा अपना प्यार छुपाता है नन्ही सी हथेली पकड़कर तू मुझे चलना सिखाता है कई बार तू इसमें बहुत थक जाता है पर तू...

Written By Rahul Garg | Your Feedback

अगर वो नाराज है तो दूर रहता रहे

अगर वो नाराज है तो दूर रहता रहे, पर कोई उसे कहे वो बात करता रहे। पैमाने बहुत थे सबको किनारा किया मैंने, भले नज़र में ना हो पर वो नज़र आता रहे। वो...

Written By kk saini | Your Feedback

बूँदे

आज जो कुछ बूंदे पड़ी थी, कुछ कुछ तुम्हारे जैसी थी.. बादल उमड़ उमड़ के आये, कुछ देर बरसात हुई… जमीं की तपिश मिटने का कुछ इमकान हुआ, पर अब चारो तरफ उमस है...

Written By Kavishala | Your Feedback

बचता फिरता बारीश से मैं आज क्यों?

बचता फिरता बारीश से मैं आज क्यों? कभी मैं बारीश में भीग जाना चाहता था लगता है डर मुझे आज करने में मौज कभी मैं रोज मस्ती में डूब जाना चाहता था दोस्त, कैसे...

Written By Kavishala, Vikas Bansal | Your Feedback

मिट जायें जो रबड़ से अब वो त्रुटियाँ नहीं होती

मिट जायें जो रबड़ से अब वो त्रुटियाँ नहीं होती क्यों आख़िर क्यों अब गरमी की छुट्टियाँ नहीं होती रास्ते तो बहुत हैं चलने को मन नही करता कि चलें क्योंकि वो पसंदीदा रास्ते...

Written By Vikas Bansal | Your Feedback

मैं नास्तिक हूँ

ख़ुदा मुझे पता है तू सब कुछ कर सकता है फिर भी कुछ तो है जो तू नहीं कर सकता। तू भी मेरी तरह है जो सोचता है वही करता है फिर भी कुछ...

Written By Aman Chandpuri | Your Feedback

सदीं का ठहराव

मण्डेला का निधन या फिर सदीं का ठहराव क्या कहें इसे एक योद्धा जो रहा अपराजेय जिसने जीती हर बाजी जीवन के हर छोर पर संघर्षों का जमावड़ा पर विचलित नहीं हुआ चेहरे पर...

Written By Aman Chandpuri | Your Feedback

जज़्बात समझता हूँ तेरे , दिन रात समझता हूँ,

जज़्बात समझता हूँ तेरे , दिन रात समझता हूँ, रिशता तेरा मेरा क्या है , नहीं जानता पर इस रिश्ते की हर एक टहनी , हर एक शाख़ समझता हूँ कबूल है मुझे तेरा...

Written By Yadunandan Sharma | 1 Comment

मुकम्मल सी कहाँ ज़िन्दगी

मुकम्मल सी कहाँ ज़िन्दगी उसपे वक्त की बेतहाशा रफ्तार हमारी रात इकाई, नींद दहाई ख्वाब सैंकडा और दर्द हज़ार नाम न लें आपका तो क्या करें बढ़ रही हिचकियों की रफ़्तार जमाना दुशमन हो...

Written By Vikas Bansal | Your Feedback

जीवन और जंगल

जलते जंगल सा सारा जीवन हुआ है व्यथा की कथा मैं कैसे सुनाऊं और आंखों में पूरा समुंदर छुपा है इक बूँद बाहर ला भी ना पाऊं… हरियाली जो मुझमें हसने कि थी जलती...

Written By Kavishala | Your Feedback

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