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Recent Poetry

चंद्रशेखर आज़ाद को समर्पित

आज़ादी के दीवाने, स्वतंत्रता समर के महानायक, निस्वार्थ सर्वस्व न्योछावर करने वाले माँ भारती के सच्चे सपूत–चंद्रशेखर आज़ाद को समर्पित:   है तुझको नमन, अभिनंदन,वन्दन हे वीर “आज़ाद“ तुझ सा प्रतापी ना अवतरित हुआ...

Written By Kavishala | Your Feedback

कितने दिन गुजर गये..आए दिल के कमरे में..

कितने दिन गुजार गये इस छोटे से एक कमरे मे बिन-बोले , बिन बात करे… अपनी ही जन्जीरो मे जकड़े सपने कहीं खाक किये ईंट मिट्टी की इन चार दिवारो मे कैसे इक साथ...

Written By Abhilasha Rasho | Your Feedback

ए इंसान ,तू धूम कर,धाम कर

मुर्दों के इलाके में एक सोचने वाला आया ,हड़कम्प मच गया है मैं छोड़ छाड़ दूंगा नौकरी चाकरी , कम से कम वो सेल्फी लेना बंद कर देगी आज के अभिमन्यू ने गाँजा पिया...

Written By Kavishala | Your Feedback

Majhdaar mein rehna nahi hai

Bhanwar ki bediya pehna nahi hai Mujhe majhdaar mein rehna nahi hai Nahi rukna mujhe manzil se pehle Sitam toofaan ke sehna nahi hai Mujhe majhdaar mein rehna nahi hai Mein dariya ke bhi...

Written By Danishmohd khan | Your Feedback

मैं, वोह और दिल्ली की बारिश।।

मैं, वो और दिल्ली की बारिश, उस पर  मेरी साथ चलने की गुजारिश फिर दोनों हांथों में मेरे, उन हांथों का सिमटना, उसकी मतवाली चाल पर , वोह पानी का छलकना उसपर  रोमांटिक मदमस्त...

Written By Muninder Rajput | Your Feedback

दिल में बाक़ी  बचे रहना तेरा

रोज़ ही आँखों से बहना तेरा। फ़िर भी दिल में बाक़ी बचे रहना तेरा। …………………………………………………… हर दिन तुझ पर यकीं दुर्ग की प्राचीरों सा, हर रात रेत की दीवारों सा  ढहना तेरा। रोज़ ही...

Written By Dr Ravindra Singh Sisodia | Your Feedback

चुनावी मुद्दा

नेताओं का गरीबों को सपने दिखाना वे काम ना आए तो धर्म पर लड़ाना जाति, धर्म पर हमको उकसाना और हमारा भीड़ बनकर वहशी हो जाना मूल मुद्दो से ध्यान भटकाना इस दौर में...

Written By Anjali Yadav | Your Feedback

शोर

झमाझम बारिश बरसती ही जाती है, बादलों की गड़गड़ भी शोर मचाती है! कानों के रस्ते ये मन में उतर जाती है, धड़कन से मिलकर बस शोर मचाती है! तपती इस धरती के खौलते...

Written By Ranjna Sharma | Your Feedback

ग़ज़ल – दर्द के समंदर उबलते है मुम्बई में

एक ग़ज़ल मुम्बई के नाम दर्द के समंदर उबलते है मुम्बई में लोग बमुश्किल हंसते है मुम्बई में तुम्हें आते ही मिली थी जगह क्या? हम तो छप्पर को तरसते है मुम्बई में ख्वाबों...

Written By Yashraj Rawal | Your Feedback

उड़ गया वो पंछी

छोड़ कर डाल उड़ गया वो पंछी नये ठिकाने की आस में नई राह, नई मंजिल और नये लोगों की तलाश में दरअसल उड़ना पसंद है उसे तो वो जल्दी थकता नहीं है राह...

Written By Gaurav Sharma | Your Feedback

एक दोस्त थी मेरी प्यारी सी

एक दोस्त है मेरी प्यारी सी। जो मुझे बहुत तड़पाती है।। गलती भी करूँ न मैं। फिर भी रूठ जाती है।। समझ नही आता मुझको। क्यूँ हमसे यूँ कर पाती है।। एक दोस्त है...

Written By Abhishek Kaushik | Your Feedback

शम्भू, महादेव, महापति

अनुचर हूँ , सेवक हूँ , दास हूँ मैं आपका, ईश चक्षु खोलिए, हाल देखो दास का।। सुर असुर घेरे हुए, प्रभा भी रिपु सी बनी, नीर झर झर बह रहे,भागीरथी आँखें बनी।। चक्षु...

Written By deepika Sharma | Your Feedback

कहावत बेकार हो गयी

आज एक और कहावत बेकार हो गयी, कोशिश करने वालों की फिर हार हो गयी!!   चमकाया था आसमां जिस सूरज ने, शाम आते-आते उसी से अदावत हो गयी!!   निकले थे घर से...

Written By Ashish Vidhuri | Your Feedback

नकाब (NAKAB)

इन  अश्को   को  बहने  दूँ   या  फिर   छुपा  लूँ   कहीं कुछ  परदे  खोल  दूँ  या  फिर  ओढ़  लूँ  नकाब  नया  कोई मैं  बगुला  सा  अडिग  निज  ध्येय  पर विश्वासघाती  प्रपंच   को  सह  नहीं  सकता ...

Written By Kavishala, Vikas Bansal | Your Feedback

ग़ज़ल- बारिश में बहुत याद आ रहा हूँ क्या?

बारिश में बहुत याद आ रहा हूँ क्या? बूंद बन कर तुम्हें भिगा रहा हूँ क्या? उसे कईं बार जाते हुए देखा है मैंने मैं बड़ी देर वहाँ पे रुका रहा हूँ क्या? कतराता...

Written By Yashraj Rawal | 1 Comment

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