The School Of Poets

कविशाला – Kavishala | The School Of Poets

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Recent Poetry

याद और कहानी

वो याद ही क्या जिसमें तेरा जिक्र न हो वो कहानी ही क्या जिसमें तेरा किस्सा न हो  

Written By YOGESH KUMAR 'Doulta' | Your Feedback

वो रक्षक हमारे।।।।।।

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लाया सवेरा कौन देख

मन की गति से तेज़ चल तू, है धरा ये मौन देख तेरे पथ पे रात ओझल, लाया सवेरा कौन देख तू स्वयं समर है, है अडिग तू, क्या बता अवरोध है है कठिन...

Written By Kavishala | Your Feedback

याद है या भूल गये

कुछ था बीच, शायद प्यार, याद है या भूल गये भूल जाने का और याद ना आने का क़रार, याद है या भूल गये मौक़े तो बहुत दिए क़िस्मतों ने मुलाक़ातों के मौक़े दस्तूरन...

Written By Ashish Saxena | Your Feedback

पुरुष हो तुम। अक्सर सुना है, पुरुषों का समाज है। तुम्हारे ही हिसाब से चलता है और, तुम्हारी ही बात करता है। पर सच शायद थोड़ा अलग है॥ देखा है मैंने कितनों को, इस...

Written By Kavishala | Your Feedback

नारी!

मत मुझे जान तू कि मैं अबला हूँ ना ही मुझे अकिंचन समझ लेना तू ना ही किसी के सहारे हूँ ना किसी से भयभीत हूँ मैं कमजोर समझने की, भूल ना करना तू...

Written By Akib Javed | Your Feedback

नन्हा तिफ्ल

चंद जुगनुओं को देखकर चाँद-तारे-आसमान चाहता है.. ये नन्हा तिफ़्ल अपनी हथेली में सारा जहान चाहता है !!

Written By Kavishala | Your Feedback

माँ की याद का जादू

तेरे याद करने की तरीके में कुछ तो जादू है माँ तेरी बाते मुझ तक पहुँचा रही है ये हिचकियाँ..

Written By Kavishala | Your Feedback

मेरे गाँव के मकान के सामने  .. पेड़ है गुमनाम…

मेरे गाँव के मकान के सामने एक पेड़ है गुमनाम… रात बिताने आते है कई पंछी उस पर यहाँ सुबह उड़ जाते है चकते हुए लेकर अपने काम।। छोटी छोटी चीटियों को अपने कंधे...

Written By Kavishala | Your Feedback

फिक्र धुंआ धुआं जब तूने छुआ

फिक्र धुंआ धुआं जब तूने छुआ ये छुअन उन सपनों की है जो उड़ान को बेकल है फिक्र फक्र है जब तुम साथ हो गर पेशानी पर शिकन न हो तो मोहब्बत कैसी पंछी...

Written By Priyanka Saini | Your Feedback

मैं सुधरना नहीं चाहता

मैं सुधरना नहीं चाहता बेवक्त मरना नहीं चाहता। हकीकतें न बयां करो बेवजह डरना नहीं चाहता। आईना न दिखाओ मुझे खुद से लड़ना नहीं चाहता। तुम खूबसूरत मत दिखो मैं कोई गहना नहीं चाहता।...

Written By nilabh Singh | Your Feedback

वीरानी लक्ष्मीबाई

चमक उठी तलवार हाथो में मुख में आभा सा दमक उठी जब दुश्मन पर नज़र पड़ी ह्रदय में एक ज्वाला जाग उठी देखो दुश्मन थर्र थर्र काँप उठा मर्दो की तरह लोहा लेतीं थी...

Written By Akib Javed | Your Feedback

मैं आ जाता हूँ

तुम.वहाँ है वही रहो मै आ जाता हूँ अंधेरा है तो क्या हुआ बादल तो चल रहे चाँद दिखाई देगा रोशनी आएगी तुम मत चलो मैं चल लेता हूँ तुम वहाँ है वहीं ….....

Written By Kundan Kumar | Your Feedback

वो सुबह कभी तो आएगी

वो सुबह कभी तो आएगी,  जब हम एक होंगे,  ना कोई उच्च होगा  और ना कोई नीच होगा,  होंगे सब आपस में भाई-भाई, जब खेतों में खुशियों के फसल लहल़ाहायेंगे-  वो सुबह कभी तो...

Written By Priyam Shri | Your Feedback

तिफ़्ल ही अच्छे हैं

हर कोई रखता है शौक साहिबजादा होने का हम तो गलती करते हैं, तिफ़्ल ही अच्छे हैं ।।

Written By YOGESH KUMAR 'Doulta' | Your Feedback


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