The School Of Poets

कविशाला – Kavishala | The School Of Poets

Kavishala Events

Recent Poetry

दिवाली है आने वाली कहके

दिवाली है आने वाली कहके वो अपने बच्चों का मन बहलाता है और कुछ दे नहीं सकता दिलासे के सिवा क्योंकि वो मिट्टी के दिये बनाता है घरों में भले ही पसरा रहता अंधेरा...

Written By Vikas Bansal | Your Feedback

ये सियासत हमें सिखाती है लड़ना पर ….

ये सियासत हमें सिखाती है लड़ना पर इनके झंडे तक एक हीं दुकान से आते हैं   जम्हूरियत से मजाक तो हमीं करते हैं इनके डंडे तक हमारे हीं मकान से आते हैं  ...

Written By Pramil Sudhir | Your Feedback

प्रथम

1.) maya ki agni m jalkar kai parivaar baithe h, iss mehfil m kuch zyaada hi hoshiyaar baithe h, 2.) kaisi duvidha khadi kari h paise ne, hamara dil banaras, aur hum bihar baithe...

Written By Abhishek Parashar | Your Feedback

बदलेगा समाज

हमेशा सोचता हूँ कि आखिर मैं क्यू सोचता हूँ गर नही बदलेगा जमाना तो फिर ना बदलेगा समाज! लेकिन बाद में सोंचते हुये फिर ये सोचता हूँ गर आज हम ना बदले फिर तो...

Written By Akib Javed | Your Feedback

मुझे तवज्जो मत दो,न ही मुझे तुम दाद दो

मुझे तवज्जो मत दो,न ही मुझे तुम दाद दो इस रिश्ते को लेकिन न नफरत की खाद दो। ब्लैक होल है ये दिल,कुछ वापिस जाता नहीं घुट घुट के मर जाऊँगा,मुझे न कोई याद...

Written By nilabh Singh | Your Feedback

बहनें बचपन के दिनों में मित्र ज्यादा होती थीं

बहनें बचपन के दिनों में मित्र ज्यादा होती थीं बड़ी तो मम्मी-पापा और ज्यादा कहें तो दादा-दादी और छुटकी तो हमारे रौब के दाब में रहती लेकिन जब छुटकी और मैं एक हो जाते...

Written By Bahadur Patel | Your Feedback

तेज़ हवा के झोंके – नज़ाकत फूलों की कहाँ समझते हैं

तेज़ हवा के झोंके नज़ाकत फूलों की कहाँ समझते हैं जिनका मर चुका पानी आँख का हिफाज़त असूलों की कहाँ समझते हैं उड़ते रहते हैं हवा में भले वो शरारत झूलों की कहाँ समझते...

Written By Vikas Bansal | Your Feedback

बेमौसम पतझड़

रेत के जैसे फिसलती रहती हैं जिंदगी पानी के मानिंद बहती चली जा रही हैं! कौन कंहा किस ओर कब चला जा रहा हैं समुद्र बिना किनारे के बहते चला जा रहा हैं। सोचते...

Written By Akib Javed | Your Feedback

ऐसे थे हमारे वो गुरु महान…

ऐसे थे हमारे वो गुरु महान… अनुपम अद्वैत अमर आभा स्वर बाजे युग युग ललाम देवो से भी अग्रगण्य उस असल कहानी को सलाम ऐसे थे हमारे वो गुरु महान… जीवन की पीड़ा मानव...

Written By Ankur Mishra | Your Feedback

तुम्हारी आँखों में

झील कंकड़ी मछली और लहर तुम्हारी आँखों में देख रहा हूँ भटकी हुई भँवर तुम्हारी आँखों में। धुप छाँव बरसात ठण्ड हर मौसम तुम्हारी आँखों में कुछ घबराया सा रहता हैं डर तुम्हारी आँखों...

Written By Akib Javed | Your Feedback

किसी भूखे की भुख को मिटाने के लिए

किसी भूखे की भुख को मिटाने के लिए । अपने खाने की एक रोटी त्याग देते है । लड़े थे जो शरहद पर जान हमारी बचाने के लिए । चलो फिर नमन उनको हजार...

Written By Abhishek Gupta | Your Feedback

चाँद

#चाँद_1 चाँद ना हो गया दुआओ का महल हो गया । लोग देख कर लम्बी उम्र मांग लेते है ।। वो अपनी छत पर मैं अपनी छत पर । चाँद को देख कर नजर...

Written By Abhishek Gupta | Your Feedback

साथ किसी का हम छोडते नही है

साथ किसी का हम छोडते नही है किन्तु …. लोभी मन वाला हमें दोस्त नही चाहिए…. साजिश करे जो कोई पीठ पीछे तो फिर…. ऎसे व्यक्ति को कैसे छ्मा दान मिलना चाहिए…. देश की...

Written By Abhishek Gupta | Your Feedback

तुम हो…तो खुश हूं

मेरे हर एक दुख में तुम हसी बन कर आए हो.. मेरी रूखी आंखो मे तुम खुशी के आसुओं  का ठिकाना लेकर आए हो.. हसी के सातों रंगो में डूबा है मेरा जहां.. इन...

Written By Atul Pratap | 1 Comment

क्या आयेंगे राम श्मशान बच्चों के ?

हजारों लीटर तेल जला दीये लाखों रोशन करने को बुझ गया मगर एक नन्हा-सा दीया भात भात कहके उसकी सांसों की लौ फडकती रही आधार कार्ड नहीं था उसका पेट नन्हा सा अपना भरने...

Written By Dr. Kumar Vinod | Your Feedback

DOWNLOAD OUR APP