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#तलाक़ #तलाक़ #तलाक़

एक लफ्ज़ को बस तीन दफा कह कर के, तुमने मुझको सनम कहीं का भी नहीं छोड़ा है। किसको अपना कहूँ किसको बेगाना तुम ही कहो, अब भरोसा तो किसी का भी नहीं छोड़ा...

Written By Kavishala | Your Feedback

जब सच से इंकार हो… तब हुंकार हो

जब सच से इंकार हो तब हुंकार हो। इक बहू पे अंगार हो तब हुंकार हो। जब कीमत श्रृंगार हो तब हुंकार हो। शत्रु की ललकार हो तब हुंकार हो। जब पीछे से वार...

Written By nilabh Singh | Your Feedback

तुम बस इतना करना ~

  राफ्तार बढ़ाने में थोड़ा वक्त लग सकता है, चलना बहुत संभल कर सिखाया गया था ना पर देखना एक तेज़ दौड़ ले, आ जाऊंगी तुम तक तुम बस इतना करना, मेरा इंतेज़ार करना...

Written By Ayman Jamal | Your Feedback

एक बार फिर से वो बचपन दिला दो

एक बार फिर से वो बचपन दिला दो सपने बुनती आँखें , लड़ता दिल दिला दो समाज की न पड़ी हो बेड़ियाँ जहाँ पे आज़ाद नज़रों को वो मंज़र दिखा दो एक बार फिर...

Written By Rajni Kapoor | Your Feedback

वैसी मिट्टी वैसा पानी अब वह सँसार कहाँ

जन से जन का सच्चे मन का अब वह प्यार कहाँ, वैसी मिट्टी वैसा पानी अब वह सँसार कहाँ। स्वार्थ सिद्धि के हेतु बने रिश्ते नाते जँजीरे, मानस पट पर खीचीं हुई हैं कैसी...

Written By Shiv Kumar | Your Feedback

अपने दिल को बड़ी मुश्किल से मनाया होगा

अपने दिल को बड़ी मुश्किल से मनाया होगा, जिस शिल्पी ने तेरे दिल को बनाया होगा। होगी अफरार उसे और तश्बुर तेरा, छोड़ कर जब तुझे मेले मे घर आया होगा। कहाँ से ला...

Written By Shiv Kumar | Your Feedback

हुंकार

रण भेदी पर हुंकार भरो अपने कर्तव्य के पथ पर अड़ो मत सोचो कि क्या होगा अपने पथ पर आगे बढ़ो हुंकार भरो पथ पर बढ़ने की धर्म से ऊपर उठने की हो जाओगे...

Written By Akib Javed | Your Feedback

वो दिन

भाग दौड़ की जिंदगी में, याद आते है अब वो दिन जब हम छोटे बच्चे थे, और कटते थे हस हस कर दिन सुबह सुबह जल्दी उठ कर, अब सिर्फ भागम दौड़ है कंही...

Written By Akib Javed | Your Feedback

पत्थर

मारोगे, हथौड़े से, मेरे टुकड़े बना दोगे। टूट कर के, चूर हो कर, मैं बिखर जाऊंगा। मै मगर , इन्सान सा, बहुरुपिया नहीं। मै यहां, हर हाल मे, पत्थर ही कहाऊँगा ।।

Written By Shiv Kumar | Your Feedback

नाजुक भूख

नाजुक भूख न जाने कैसे असमान से या धरती से उपजती है कभी खुद ठहर जाती है कभी बहुत तडपती है निःशब्द साथ साथ रस्ते नापती धुप में साथ तपती, बरसती और ठिठुरती नाजुक...

Written By Ankur Mishra | Your Feedback

बादल…

जब खाना खाने के बाद तुम, थाली में अपनी उंगलियों से चित्र बनाती हो। तो पता नहीं क्यों मैं उस वक्त, बादलों के बारे में सोचता हूँ। उस समय एक चुप्पी रहती है। अजीब...

Written By Manav Kaul | Your Feedback

मुसलसल दिल में थोड़ा गम रहता है

मुसलसल दिल में थोड़ा गम रहता है गुरूर खुद पे इससे ज़रा कम रहता है। ये घर बहुत उदास है किसी के जाने से इसका आँगन हमेशा ही नम रहता है। कहने को नौकरी...

Written By nilabh Singh | Your Feedback

एक और सुबह

हर रोज दफ्तर में बेवक्त एक शाम आती है, एक जाम लिए कभी भोजनालय में तो कभी मदिरालय में, शोर और अट्ठाहस होता है हर जगह जिस्म और तिलस्म का… फिर घर मिलता है...

Written By Ankur Mishra | Your Feedback

कोई कह दे मौसम से यूँ ज़रा

कोई कह दे मौसम से यूँ ज़रा कि हमें वो इस क़दर न बहकाये जिन्हें भूल चूके हैं हम अब यहाँ करें याद, उन्हें हिचकी न आ जाये वो ना बरसा तब, जब ज़रूरत...

Written By Vikas Bansal | Your Feedback

बहुत संजीदा रहता है हर शख्स यहाँ

बहुत संजीदा रहता है हर शख्स यहाँ जुल्म जज्बात पे करता है, हर शख्स यहाँ। दिन गुजर जाता है, कट जाती है रात भी थोड़ा जीने को थोड़ा मरता है हर शख्स यहाँ। जुबां...

Written By nilabh Singh | Your Feedback

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