जब सनम कूँ ख़याल-ए-बाग़ हुआ's image
1 min read

जब सनम कूँ ख़याल-ए-बाग़ हुआ

Wali Muhammad WaliWali Muhammad Wali
0 Bookmarks 34 Reads0 Likes

जब सनम कूँ ख़याल-ए-बाग़ हुआ

तालिब-ए-नश्शा-ए-फ़राग़ हुआ

फ़ौज-ए-उश्शाक़ देख हर जानिब

नाज़नीं साहिब-ए-दिमाग़ हुआ

रश्क सूँ तुझ लबाँ की सुर्ख़ी पर

जिगर-ए-लाला दाग़-दाग़ हुआ

दिल-ए-उश्शाक़ क्यूँ न हो रौशन

जब ख़याल-ए-सनम चराग़ हुआ

ऐ 'वली' गुल-बदन कूँ बाग़ में देख

दिल-ए-सद-चाक बाग़-बाग़ हुआ

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts