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फ़िदा-ए-दिलबर-ए-रंगीं-अदा हूँ

Wali Muhammad WaliWali Muhammad Wali
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फ़िदा-ए-दिलबर-ए-रंगीं-अदा हूँ

शहीद-ए-शाहिद-ए-गुल-गूँ-क़बा हूँ

हर इक मह-रू के मिलने का नहीं ज़ौक़

सुख़न के आश्ना का आश्ना हूँ

किया हूँ तर्क नर्गिस का तमाशा

तलबगार-ए-निगाह-ए-बा-हया हूँ

न कर शमशाद की तारीफ़ मुझ पास

कि मैं उस सर्व-क़द का मुब्तला हूँ

किया मैं अर्ज़ उस ख़ुर्शीद-रू सूँ

तू शाह-ए-हुस्न मैं तेरा गदा हूँ

सदा रखता हूँ शौक़ उस के सुख़न का

हमेशा तिश्ना-ए-आब-ए-बक़ा हूँ

क़दम पर उस के रखता हूँ सदा सर

'वली' हम-मशरब-ए-रंग-ए-हिना हूँ

 

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