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दिल कूँ तुझ बाज बे-क़रारी है

Wali Muhammad WaliWali Muhammad Wali
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दिल कूँ तुझ बाज बे-क़रारी है

चश्म का काम अश्क-बारी है

शब-ए-फ़ुर्क़त में मोनिस ओ हमदम

बे-क़रारों कूँ आह-ओ-ज़ारी है

ऐ अज़ीज़ाँ मुझे नहीं बर्दाश्त

संग-दिल का फ़िराक़ भारी है

फ़ैज़ सूँ तुझ फ़िराक़ के साजन

चश्म-ए-गिर्यां का काम जारी है

फ़ौक़ियत ले गया हूँ बुलबुल सूँ

गरचे मंसब में दो-हज़ारी है

इश्क़-बाज़ों के हक़ में क़ातिल की

हर निगह ख़ंजर ओ कटारी है

आतिश-ए-हिज्र-ए-लाला-रू सूँ 'वली'

दाग़ सीने में यादगारी है

 

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