स्वर's image
1 min read

स्वर

TrilochanTrilochan
0 Bookmarks 107 Reads0 Likes

स्वर व्यतीत कदापि नहीं हुए
समय-तार बजा कर जो जगे,
रँग गई धरती अनुराग से,
गगन में नवगुंजन छा गया ।

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts