इच्छा होती है जब's image
1 min read

इच्छा होती है जब

Teji GroverTeji Grover
0 Bookmarks 81 Reads0 Likes

मालूम नहीं
इच्छा होती है जब
कि आए वह

क्या वह रूठ गई होती है
खेत-हार में सूख रहे
पूसों के बीच

दिन-दहाड़े
छब्बीस मार्च के दिन

जब कोई शक नहीं कि दहक रहे हैं तीन-तीन पेड़ों के फूल

हलके स्पर्श में चित्र-सरीखी बैठी हुई बकरियाँ
हलके बुखार में तप रही हैं

स्मृति
जब सिर्फ़ और सिर्फ़ एक आगोश है
दिशाओं में लरज़ती हुई

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts