गज अलि मीन पतंग मृग's image
1 min read

गज अलि मीन पतंग मृग

SunderdasSunderdas
0 Bookmarks 564 Reads0 Likes

गज अलि मीन पतंग मृग, इक-इक दोष बिनाश।

जाके तन पाँचौं बसै, ताकी कैसी आश॥

सुंदर जाके बित्त है, सो वह राखैं गोइ।

कौडी फिरै उछालतो, जो टुटपूँज्यो होइ॥

मन ही बडौ कपूत है, मन ही बडौ सपूत।

'सुंदर जौ मन थिर रहै, तो मन ही अवधूत॥

 

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts