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कंकावती-1

Rajkamal ChoudharyRajkamal Choudhary
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नसों की पीली धारियाँ।
एक प्यालारोशनी।
टूटे हुए मकड़ी-जाल
पर शाम की धूप।
वह अपने घुटनों में
सिर डालकर
पी जाना चाहती है हर सुबह।

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