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भाषा अब वेश्या है

Rajkamal ChoudharyRajkamal Choudhary
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भाषा अब वेश्या है।
सबकी बाँहों में समायी हुई,
सबके ओठों पर बसी रहती है।
उसके विवस्त्र अंगों में अब कोई अर्थनहीं।

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