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किसान

Pawan KaranPawan Karan
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इन दिनों उसके पास रहो

उसे अपनी आंखों से दूर नहीं होने दो

उसका उदास हाथ अपने हाथों में ले लो

उसकी हताश चाल में मिला दो अपनी चाल

उसके दिमाग़ से उस फन्दे को खोल दो

जिसे वह भीतर-ही-भीतर बुन रहा है

उस रास्ते में हाथ जोड़कर खड़े हो जाओ

जो उसे रेल की पटरियों तक लेकर जाता है

घड़ी के कांटे से भी तेज़ गाति से

मौत की तरफ़ भाग रहा है किसान इन दिनों

वो तब तक नहीं रुकेगा जब तक

हम अपनी परोसी हुई थाली में

उसे पकड़कर खाने के लिए नहीं बिठा लेंगे

अरे देखो, आधी रात घर से

वह चुपचाप कहां जा रहा है?

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