गोपी प्रेम की ध्वजा's image
1 min read

गोपी प्रेम की ध्वजा

ParamanandadasParamanandadas
0 Bookmarks 205 Reads0 Likes

गोपी प्रेम की ध्वजा ।
निज गोपाल किते अपने वश उरधर श्याम भुजा ॥१॥
शुक मुनि व्यास प्रशंसा कीनी ऊधो संत सराही ।
भुरि भाग्य गोकुल की वनिता अति पुनीत भवमांहि ॥२॥
कहा भयो जो विप्रकुल जनम्यो जो हरिसेवा नाही ।
सोई कुलीन दास परमानंद जो हरि सन्मुख धाई ॥३॥

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts