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पथरीली चट्टान पर

हथौड़े की चोट

चिंगारी को जन्‍म देती है

जो गाहे-बगाहे आग बन जाती है

.

आग में तपकर

लोहा नर्म पड़ जाता है

ढल जाता है

मनचाहे आकार में

हथौड़े की चोट में ।


एक तुम हो,

जिस पर किसी चोट का

असर नहीं होता ।


(फ़रवरी, 1985)


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