बे-नाम सा दर्द's image
1 min read

बे-नाम सा दर्द

Nida FazliNida Fazli
2 Bookmarks 916 Reads15 Likes

बे-नाम सा ये दर्द ठहर क्यूँ नहीं जाता

जो बीत गया है वो गुज़र क्यूँ नहीं जाता

सब कुछ तो है क्या ढूँढती रहती हैं निगाहें

क्या बात है मैं वक़्त पे घर क्यूँ नहीं जाता

वो एक ही चेहरा तो नहीं सारे जहाँ में

जो दूर है वो दिल से उतर क्यूँ नहीं जाता

मैं अपनी ही उलझी हुई राहों का तमाशा

जाते हैं जिधर सब मैं उधर क्यूँ नहीं जाता

वो ख़्वाब जो बरसों से न चेहरा न बदन है

वो ख़्वाब हवाओं में बिखर क्यूँ नहीं जाता

 

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts