धुआँ कलेजे से मेरे निकला's image
2 min read

धुआँ कलेजे से मेरे निकला

Nazeer AkbarabadiNazeer Akbarabadi
0 Bookmarks 48 Reads0 Likes

धुआँ कलेजे से मेरे निकला जला जो दिल बस कि रश्क खा कर

वो रश्क ये था कि ग़ैर से टुक हँसा था चंचल मिसी लगा कर

फ़क़त जो चितवन पे ग़ौर कीजे तो वो भी वो सेहर है कि जिस का

करिश्मा बंदा ग़ुलाम ग़म्ज़ा दग़ाएँ नौकर फ़रेब चाकर

ख़िराम की है वो तर्ज़ यारो कि जिस में निकलें कई अदाएँ

क़दम जो रखना तो तन के रखना जो फिर उठाना तो डगमगा कर

लटक में बंदों की दिल जो आवे तो ख़ैर बंदे ही उस को ले लें

वगर्ना आवे तो फिर न छोड़े उधर से बाला झमक दिखा कर

मजाल क्या है जो दू-बदू हो नज़र से कोई नज़र लड़ावे

मगर किसी ने जो उस को देखा तो सौ ख़राबी से छुप छुपा कर

सुने किसी के न दर्द-ए-दिल को वगर सुने तो झिड़क के उस को

ये साफ़ कह दे तो क्या बला है जो सर फिराता है नाहक़ आ कर

'नज़ीर' वो बुत है दुश्मन-ए-जाँ न मिलियो उस से तू देख हरगिज़

वगर मिला तो ख़ुदा है हाफ़िज़ बचे हैं हम भी ख़ुदा ख़ुदा कर

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts