मेरे महबूब तुम हो यार तुम हो दिल-रुबा तुम हो's image
2 min read

मेरे महबूब तुम हो यार तुम हो दिल-रुबा तुम हो

Muztar KhairabadiMuztar Khairabadi
0 Bookmarks 86 Reads0 Likes

मेरे महबूब तुम हो यार तुम हो दिल-रुबा तुम हो

ये सब कुछ हो मगर मैं कह नहीं सकता कि क्या तुम हो

तुम्हारे नाम से सब लोग मुझ को जान जाते हैं

मैं वो खोई हुई इक चीज़ हूँ जिस का पता तुम हो

मोहब्बत को हमारी इक ज़माना हो गया लेकिन

न तुम समझे कि क्या मैं हूँ न मैं समझा कि क्या तुम हो

हमारे दिल को बहर-ए-ग़म की क्या ताक़त जो ले बैठे

वो कश्ती डूब कब सकती है जिस के ना-ख़ुदा तुम हो

बिछड़ना भी तुम्हारा जीते-जी की मौत है गोया

उसे क्या ख़ाक लुत्फ़-ए-ज़िंदगी जिस से जुदा तुम हो

मुसीबत का तअ'ल्लुक़ हम से कुछ भी हो तो राहत है

मिरे दिल को ख़ुदा वो दर्द दे जिस की दवा तुम हो

कहीं इस फूटे-मुँह से बेवफ़ा का लफ़्ज़ निकला था

बस अब ता'नों पे ता'ने हैं कि बे-शक बा-वफ़ा तुम हो

क़यामत आएगी या आ गई इस की शिकायत क्या

क़यामत क्यूँ न हो जब फ़ित्ना-ए-रोज़-ए-जज़ा तुम हो

उलझ पड़ने में काकुल हो बिगड़ने में मुक़द्दर हो

पलटने में ज़माना हो बदलने में हवा तुम हो

वो कहते हैं ये सारी बेवफ़ाई है मोहब्बत की

न 'मुज़्तर' बे-वफ़ा मैं हूँ न 'मुज़्तर' बे-वफ़ा तुम हो

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts