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तुमन रौशनी बिन हमन रौशनी नाह

Muhammad Quli Qutb ShahMuhammad Quli Qutb Shah
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तुमन रौशनी बिन हमन रौशनी नाह

तू दीदार बिन सभी दीदार हैं काह

सभी झाड़ कूँ पत-झड़ी बाव आया

चकर खाँस पर है नज़र तू दिसूँ शाह

तुमन ख़्याल सेती हमें ख़्याल बाँधे

रक़ीबाँ न बूझें ये बात आह है आह

नमाज़ाँ करूँ रात दिन मलने क्याँ मैं

हवा मुंज कूँ रोज़ी ज़ुलहमदुल्लिाह

अंधारे के बादल मुंजे बेड़ी चौ-पहर

ख़ुदाया तू भेजें हमन बाद-ए-दिल-ख़्वाह

कता सब्र फ़रियाद कर चुप न रह तूँ

करूँ आह आहाँ तूँ नीं होता आगाह

हुआ बे-क़रार आह आहाँ ते मैं अब

नज़र बा-मुंज उपर दसूँगा कि जियूँ माह

करेगा अगर याद वो मुंज दुखी कूँ

करूँ याद अगर किस कूँ असतग़फ़िरुल्लाह

'मअानी' है आजिज़ तिरी ख़िदमताँ में

नहीं सुद-बुद उस कूँ तूँ कर सब थे आगाह

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