तिरे सोफ़े हैं अफ़रंगी's image
1 min read

तिरे सोफ़े हैं अफ़रंगी

Muhammad IqbalMuhammad Iqbal
0 Bookmarks 33 Reads0 Likes

तिरे सोफ़े हैं अफ़रंगी तिरे क़ालीं हैं ईरानी

लहू मुझ को रुलाती है जवानों की तन-आसानी

इमारत किया शिकवा-ए-ख़ुसरवी भी हो तो क्या हासिल

न ज़ोर-ए-हैदरी तुझ में न इस्तिग़ना-ए-सलमानी

न ढूँड उस चीज़ को तहज़ीब-ए-हाज़िर की तजल्ली में

कि पाया मैं ने इस्तिग़्ना में मेराज-ए-मुसलमानी

उक़ाबी रूह जब बेदार होती है जवानों में

नज़र आती है उन को अपनी मंज़िल आसमानों में

न हो नौमीद नौमीदी ज़वाल-ए-इल्म-ओ-इरफ़ाँ है

उमीद-ए-मर्द-ए-मोमिन है ख़ुदा के राज़-दानों में

नहीं तेरा नशेमन क़स्र-ए-सुल्तानी के गुम्बद पर

तू शाहीं है बसेरा कर पहाड़ों की चटानों में

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts