बदल के भेस's image
1 min read

बदल के भेस

Muhammad IqbalMuhammad Iqbal
0 Bookmarks 51 Reads0 Likes

बदल के भेस फिर आते हैं हर ज़माने में

अगरचे पीर है आदम जवाँ हैं लात-ओ-मनात

ये एक सज्दा जिसे तू गिराँ समझता है

हज़ार सज्दे से देता है आदमी को नजात

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts