बलाएँ आँखों से उन की मुदाम लेते हैं's image
2 min read

बलाएँ आँखों से उन की मुदाम लेते हैं

Muhammad Ibrahim ZauqMuhammad Ibrahim Zauq
0 Bookmarks 83 Reads0 Likes

बलाएँ आँखों से उन की मुदाम लेते हैं

हम अपने हाथों का मिज़्गाँ से काम लेते हैं

हम उन की ज़ुल्फ़ से सौदा जो वाम लेते हैं

तो अस्ल ओ सूद वो सब दाम दाम लेते हैं

शब-ए-विसाल के रोज़-ए-फ़िराक़ में क्या क्या

नसीब मुझ से मिरे इंतिक़ाम लेते हैं

क़मर ही दाग़-ए-ग़ुलामी फ़क़त नहीं रखता

वो मोल ऐसे हज़ारों ग़ुलाम लेते हैं

हम उन के ज़ोर के क़ाइल हैं हैं वही शह-ज़ोर

जो इश्क़ में दिल-ए-मुज़्तर को थाम लेते हैं

क़तील-ए-नाज़ बताते नहीं तुझे क़ातिल

जब उन से पूछो अजल ही का नाम लेते हैं

तिरे असीर जो सय्याद करते हैं फ़रियाद

तो फिर वो दम ही नहीं ज़ेर-ए-दाम लेते हैं

झुकाए है सर-ए-तस्लीम माह-ए-नौ पर वो

ग़ुरूर-ए-हुस्न से किस का सलाम लेते हैं

तिरे ख़िराम के पैरू हैं जितने फ़ित्ने हैं

क़दम सब आन के वक़्त-ए-ख़िराम लेते हैं

हमारे हाथ से ऐ 'ज़ौक़' वक़्त-ए-मय-नोशी

हज़ार नाज़ से वो एक जाम लेते हैं

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts