अगर ग़फ़लत से बाज़ आया जफ़ा की's image
2 min read

अगर ग़फ़लत से बाज़ आया जफ़ा की

Momin Khan MominMomin Khan Momin
0 Bookmarks 350 Reads0 Likes

अगर ग़फ़लत से बाज़ आया जफ़ा की

तलाफ़ी की भी ज़ालिम ने तो क्या की

मरे आग़ाज़-ए-उल्फ़त में हम अफ़्सोस

उसे भी रह गई हसरत जफ़ा की

कभी इंसाफ़ है देखा न दीदार

क़यामत अक्सर उस कू में रहा की

फ़लक के हाथ से मैं जा छुपूँ गर

ख़बर ला दे कोई तहतुस-सरा की

शब-ए-वस्ल-ए-अदू क्या क्या जला हूँ

हक़ीक़त खुल गई रोज़-ए-जज़ा की

चमन में कोई उस कू से न आया

गई बर्बाद सब मेहनत सबा की

कुशाद-ए-दिल पे बाँधी है कमर आज

नहीं है ख़ैरियत बंद-ए-क़बा की

किया जब इल्तिफ़ात उस ने ज़रा सा

पड़ी हम को हुसूल-ए-मुद्दआ की

कहा है ग़ैर ने तुम से मिरा हाल

कहे देती है बेबाकी अदा की

तुम्हें शोर-ए-फ़ुग़ाँ से मेरे क्या काम

ख़बर लो अपनी चश्म-ए-सुर्मा-सा की

दिया इल्म ओ हुनर हसरत-कशी को

फ़लक ने मुझ से ये कैसी दग़ा की

ग़म-ए-मक़्सद-रसी ता नज़अ और हम

अब आई मौत बख़्त-ए-ना-रसा की

मुझे ऐ दिल तिरी जल्दी ने मारा

नहीं तक़्सीर उस देर-आश्ना की

जफ़ा से थक गए तो भी न पूछा

कि तू ने किस तवक़्क़ो पर वफ़ा की

कहा उस बुत से मरता हूँ तो 'मोमिन'

कहा मैं क्या करूँ मर्ज़ी ख़ुदा की

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts