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बुलबुल ने जिसे जा के गुलिस्तान में देखा

Mirza Mohammad rafi 'SaudaMirza Mohammad rafi 'Sauda
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बुलबुल ने जिसे जा के गुलिस्तान में देखा

हम ने उसे हर ख़ार-ए-बयाबान में देखा

रौशन है वो हर एक सितारे में ज़ुलेख़ा

जिस नूर को तू ने सर-ए-कनआन में देखा

बरहम करे जमइय्यत-ए-कौनैन जो पल में

लटका वो तिरी ज़ुल्फ़-ए-परेशान में देखा

वाइज़ तू सुने बोले है जिस रोज़ की बातें

उस रोज़ को हम ने शब-ए-हिज्रान में देखा

ऐ ज़ख़्म-ए-जिगर सूदा-ए-अल्मास से ख़ू कर

कितना वो मज़ा था जो नमक-दान में देखा

'सौदा' जो तिरा हाल है इतना तो नहीं वो

क्या जानिए तू ने उसे किस आन में देखा

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