पद्मावत रत्नसेन-जन्म-खंड's image
1 min read

पद्मावत रत्नसेन-जन्म-खंड

Malik Muhammad JayasiMalik Muhammad Jayasi
0 Bookmarks 38 Reads0 Likes


चित्रसेन चितउर गढ राजा । कै गढ कोट चित्र सम साजा ॥
तेहि कुल रतनसेन उजियारा । धनि जननी जनमा अस बारा ॥
पंडित गुनि सामुद्रिक देखा । देखि रूप औ लखन बिसेखा ॥
रतनसेन यह कुल-निरमरा । रतन-जोति मन माथे परा ॥
पदुम पदारथ लिखी सो जोरी । चाँद सुरुज जस होइ अँजोरी ॥
जस मालति कहँ भौंर वियोघी । तस ओहि लागि होइ यह जोगी ।
सिंघलदीप जाइ यह पावै । सिद्ध होइ चितउर लेइ आवै ॥

मोग भोज जस माना, विक्रम साका कीन्ह ।
परखि सो रतन पारखी सबै लखन लिखि दीन्ह ॥1॥


(1) पदुम = पद्मावती की ओर लक्ष्य है । भोज = राजा भोज । लखन = लक्षण ।

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts