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ज़िंदगी सोज़ बने साज़ न होने पाए

Kunwar Mohinder Singh BediKunwar Mohinder Singh Bedi
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ज़िंदगी सोज़ बने साज़ न होने पाए

दिल तो टूटे मगर आवाज़ न होने पाए

दर्द अगर शामिल-ए-आवाज़ न होने पाए

कोई मोनिस कोई दम-साज़ न होने पाए

जाम से कुछ को पिला कुछ को निगाहों से मगर

कोई मय-कश नज़र-अंदाज़ न होने पाए

लुत्फ़ जब है कि रहे इश्क़ सदा महव-ए-नियाज़

और इस बात पे भी नाज़ न होने पाए

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