मृगनैनी की पीठ पै बेनी लसै's image
1 min read

मृगनैनी की पीठ पै बेनी लसै

Kavi GangKavi Gang
0 Bookmarks 173 Reads0 Likes

मृगनैनी की पीठ पै बेनी लसै, सुख साज सनेह समोइ रही।
सुचि चीकनी चारु चुभी चित में, भरि भौन भरी खुसबोई रही॥
कवि 'गंग’ जू या उपमा जो कियो, लखि सूरति या स्रुति गोइ रही।
मनो कंचन के कदली दल पै, अति साँवरी साँपिन सोइ रही॥

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts