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सबन के ऊपर ही ठाढ़ो रहिबे के जोग

Kavi BhushanKavi Bhushan
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सबन के ऊपर ही ठाढ़ो रहिबे के जोग,
ताहि खरो कियो जाय जारन के नियरे .
जानि गैर मिसिल गुसीले गुसा धारि उर,
कीन्हों न सलाम, न बचन बोलर सियरे.
भूषण भनत महाबीर बलकन लाग्यौ,
सारी पात साही के उड़ाय गए जियरे .
तमक तें लाल मुख सिवा को निरखि भयो,
स्याम मुख नौरंग, सिपाह मुख पियरे.

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