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नज़्ज़ारा-ए-पैहम का सिला मेरे लिए है

Hasrat MohaniHasrat Mohani
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नज़्ज़ारा-ए-पैहम का सिला मेरे लिए है

हर सम्त वो रुख़ जल्वा-नुमा मेरे लिए है

उस चेहरा-ए-अनवर की ज़िया मेरे लिए है

वो ज़ुल्फ़-ए-सियह ताब-ए-दोता मेरे लिए है

ज़िन्हार अगर अहल-ए-हवस तुझ पे फ़िदा हूँ

ये मर्तबा-ए-सदक़-ओ-सफ़ा मेरे लिए है

बन कर मैं रज़ाकार मुहय्याए-फ़ना हूँ

आवाज़ा-ए-हक़ बाँग-ए-दरा मेरे लिए है

ख़ुशनूदी-ए-फ़ुज्जार के पैरव हैं यज़ीदी

तक़लीद-ए-शह-ए-कर्ब-ओ-बला मेरे लिए है

महरूम हूँ मजबूर हूँ बे-ताब-ओ-तवाँ हूँ

मख़्सूस तिरे ग़म का मज़ा मेरे लिए है

सरमाया-ए-राहत है फ़ना की मुझे तल्ख़ी

इस ज़हर में सामान-ए-बक़ा मेरे लिए है

जन्नत की हवस हो तो मैं काफ़िर कि परेशाँ

उस शोख़ की ख़ुशबू-ए-क़बा मेरे लिए है

पहले भी कुछ उम्मीद न थी चारागरों को

और अब तो दवा है न दुआ मेरे लिए है

मर जाऊँगा मय-ख़ाने से निकला जो कभी मैं

नज़्ज़ारा-मय रूह-फ़ज़ा मेरे लिए है

तशख़ीस-ए-तबीबाँ पे हँसी आती है 'हसरत'

ये दर्द-ए-जिगर है कि दवा मेरे लिए है

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