अक़्ल से हासिल हुई क्या क्या पशीमानी मुझे's image
1 min read

अक़्ल से हासिल हुई क्या क्या पशीमानी मुझे

Hasrat MohaniHasrat Mohani
0 Bookmarks 47 Reads0 Likes

अक़्ल से हासिल हुई क्या क्या पशीमानी मुझे

इश्क़ जब देने लगा तालीम-ए-नादानी मुझे

रंज देगी बाग़-ए-रिज़वाँ की तन-आसानी मुझे

याद आएगा तिरा लुत्फ़-ए-सितम-रानी मुझे

मेरी जानिब है मुख़ातिब ख़ास कर वो चश्म-ए-नाज़

अब तो करनी ही पड़ेगी दिल की क़ुर्बानी मुझे

देख ले अब कहीं आ कर जो वो ग़फ़लत-शिआर

किस क़दर हो जाए मर जाने में आसानी मुझे

बे-नक़ाब आने को हैं मक़्तल में वो बे-शक मगर

देखने काहे को देगी मेरी हैरानी मुझे

सैंकड़ों आज़ादियाँ इस क़ैद पर 'हसरत' निसार

जिस के बाइस कहते हैं सब उन का ज़िंदानी मुझे

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts