कोई अटका हुआ है पल शायद's image
1 min read

कोई अटका हुआ है पल शायद

GulzarGulzar
0 Bookmarks 38 Reads0 Likes

कोई अटका हुआ है पल शायद

वक़्त में पड़ गया है बल शायद

लब पे आई मिरी ग़ज़ल शायद

वो अकेले हैं आज-कल शायद

दिल अगर है तो दर्द भी होगा

इस का कोई नहीं है हल शायद

जानते हैं सवाब-ए-रहम-ओ-करम

उन से होता नहीं अमल शायद

आ रही है जो चाप क़दमों की

खिल रहे हैं कहीं कँवल शायद

राख को भी कुरेद कर देखो

अभी जलता हो कोई पल शायद

चाँद डूबे तो चाँद ही निकले

आप के पास होगा हल शायद

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts