ख़ुशबू जैसे लोग मिले अफ़्साने में's image
1 min read

ख़ुशबू जैसे लोग मिले अफ़्साने में

GulzarGulzar
0 Bookmarks 86 Reads0 Likes

ख़ुशबू जैसे लोग मिले अफ़्साने में

एक पुराना ख़त खोला अनजाने में

शाम के साए बालिश्तों से नापे हैं

चाँद ने कितनी देर लगा दी आने में

रात गुज़रते शायद थोड़ा वक़्त लगे

धूप उन्डेलो थोड़ी सी पैमाने में

जाने किस का ज़िक्र है इस अफ़्साने में

दर्द मज़े लेता है जो दोहराने में

दिल पर दस्तक देने कौन आ निकला है

किस की आहट सुनता हूँ वीराने में

हम इस मोड़ से उठ कर अगले मोड़ चले

उन को शायद उम्र लगेगी आने में

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts