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क्या बने हमसे भला काग़ज़ की तलवारों से आज

Gulab KhandelwalGulab Khandelwal
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क्या बने हमसे भला काग़ज़ की तलवारों से आज!
दिल तड़पता है बहुत दुनिया तेरे वारों से आज

रात भर रोये हैं कैसे आपकी यादों में हम
पूछ भी लें आँसुओं के टूटते तारों से आज

जान देने का हमारे दिल में भी है हौसला
चाहते हैं खेलना कुछ हम भी अंगारों से आज

फिर किसीके प्यार ने आवाज़ दी है आपको
देखिये झुककर तो कुछ इन ऊँची मीनारों से आज

तोड़ ले जाए कोई चुपके से डाली से गुलाब
आ चुके हैं तंग हम काँटों की दीवारों से आज

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