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हाइकु रचना

Gopaldas NeerajGopaldas Neeraj
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जन्म मरण
समय की गति के
हैं दो चरण

वो हैं अकेले
दूर खडे होकर
देखें जो मेले

मेरी जवानी
कटे हुये पंखों की
एक निशानी

हे स्वर्ण केशी
भूल न यौवन है
पंछी विदेशी

वो है अपने
देखें हो मैने जैसे
झूठे सपने

किससे कहें
सब के सब दुख
खुद ही सहें

हे अनजानी
जीवन की कहानी
किसने जानी

 

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