ताहि न लीजै संग's image
1 min read

ताहि न लीजै संग

Giridhar KaviraiGiridhar Kavirai
0 Bookmarks 675 Reads0 Likes

जाको धन, धरती हरी, ताहि न लीजै संग।

ओ संग राखै ही बनै, तो करि राखु अपंग ॥

तो करि राखु अपंग, भीलि परतीति न कीजै ।

सौ सौगन्दें खाय, चित्त में एक न दीजै ॥

कह गिरिधर कविराय, कबहुँ विश्वास न वाको ।

रिपु समान परिहरिय, हरी धन, धरती जाको ॥

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts