आज पलकों को जाते हैं आँसू's image
1 min read

आज पलकों को जाते हैं आँसू

Ghulam HamdaniGhulam Hamdani
0 Bookmarks 29 Reads0 Likes

आज पलकों को जाते हैं आँसू

उल्टी गंगा बहाते हैं आँसू

आतिश-ए-दिल तो ख़ाक बुझती है

और जी को जलाते हैं आँसू

ख़ून-ए-दिल कम हुआ मगर जो मिरे

आज थम थम के आते हैं आँसू

जब तलक दीदा गिर्या-सामाँ हो

दिल में क्या जोश खाते हैं आँसू

गोखरो पर तुम्हारी अंगिया के

किस के ये लहर खाते हैं आँसू

तेरी पाज़ेब के जो हैं मोती

उन से आँखें लड़ाते हैं आँसू

शम्अ की तरह इक लगन में मिरे

'मुसहफ़ी' कब समाते हैं आँसू

फ़िक्र कर उन की वर्ना मज्लिस में

अभी तूफ़ाँ लाते हैं आँसू

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts