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मृत्यु के समान

ChanakyaChanakya
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5) दुष्टा भार्या शठं मित्रं भृत्यश्चोत्तरदायकः।
ससर्पे गृहे वासो मृत्युरेव न संशयः।।

यह साक्षात् मृत्यु के समान है अगर हम दुष्ट पत्नी, झूठा मित्र, बदमाश नौकर या सर्प के साथ निवास करते है|

 

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