बैरिनि बाँसुरी फेरि बजी's image
1 min read

बैरिनि बाँसुरी फेरि बजी

Bhartendu HarishchandraBhartendu Harishchandra
0 Bookmarks 35 Reads0 Likes

बैरिनि बाँसुरी फेरि बजी।
सुनत श्रवन मन थकित भयो अरु मति गति जाति भजी।
सात सुरन अरु तीन ग्राम सों पिय के हाथ सजी।
’हरीचंद’ औरहु सुधि मोही जबही अधर तजी॥

 

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts