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मोहब्बत सोज़ भी है साज़ भी है

Arsh MalsianiArsh Malsiani
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मोहब्बत सोज़ भी है साज़ भी है
ख़ामोशी भी है आवाज़ भी है

नशेमन के लिये बेताब ताईर
वहाँ पाबन्दी-ए-परवाज़ भी है

ख़ामोशी पे भरोसा करने वालो
ख़ामोशी ग़म का गम्माज़ भी है

मेरी ख़ामोशि-ए-दिल पर न जाओ
कि इस में रूह की आवाज़ भी है

दिल-ए-बेगाना-ख़ूँ, दुनिया में तेरा
कोई हमदम कोई हमराज़ भी है

है मेराज-ए-ख़िरद भी अर्श-ए-अज़ीम
जुनूँ का फ़र्श-ए-पा अंदाज़ भी है

 

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