नया वर्ष-१'s image
1 min read

नया वर्ष-१

AnamikaAnamika
0 Bookmarks 29 Reads0 Likes


अटट ठण्ड है, बाबा !
बतखों के रोओं पर कीचड़ सिहरती है !
नए साल का पहला अख़बार एक था
साइकिल के कैरियर पर समेटे हुए,
कोहरे की गाँती कसके लपेटे हुए
बेमन से निकला है सूरज !

चलो, गनीमत है कि निकला तो ।
राहतें आती हैं ज़िन्दगी में ऐसे ही
थके हुए क़दमों से चलकर
जैसे कि दंगे में मरे हुए लोगों के घर आता है
सरकारी मुआवजा
अपनी बगलें झांकता,
नाकाफ़ियत पर शर्मिन्दा

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts