रंज और रंज भी तन्हाई का's image
2 min read

रंज और रंज भी तन्हाई का

Altaf Hussain HaliAltaf Hussain Hali
0 Bookmarks 45 Reads0 Likes

रंज और रंज भी तन्हाई का

वक़्त पहुँचा मिरी रुस्वाई का

उम्र शायद न करे आज वफ़ा

काटना है शब-ए-तन्हाई का

तुम ने क्यूँ वस्ल में पहलू बदला

किस को दा'वा है शकेबाई का

एक दिन राह पे जा पहुँचे हम

शौक़ था बादिया-पैमाई का

उस से नादान ही बन कर मिलिए

कुछ इजारा नहीं दानाई का

सात पर्दों में नहीं ठहरती आँख

हौसला क्या है तमाशाई का

दरमियाँ पा-ए-नज़र है जब तक

हम को दा'वा नहीं बीनाई का

कुछ तो है क़द्र तमाशाई की

है जो ये शौक़ ख़ुद-आराई का

उस को छोड़ा तो है लेकिन ऐ दिल

मुझ को डर है तिरी ख़ुद-राई का

बज़्म-ए-दुश्मन में न जी से उतरा

पूछना क्या तिरी ज़ेबाई का

यही अंजाम था ऐ फ़स्ल-ए-ख़िज़ाँ

गुल ओ बुलबुल की शनासाई का

मदद ऐ जज़्बा-ए-तौफ़ीक़ कि याँ

हो चुका काम तवानाई का

मोहतसिब उज़्र बहुत हैं लेकिन

इज़्न हम को नहीं गोयाई का

होंगे 'हाली' से बहुत आवारा

घर अभी दूर है रुस्वाई का

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts