कह दो कोई साक़ी से कि हम मरते हैं प्यासे's image
1 min read

कह दो कोई साक़ी से कि हम मरते हैं प्यासे

Altaf Hussain HaliAltaf Hussain Hali
0 Bookmarks 216 Reads0 Likes

कह दो कोई साक़ी से कि हम मरते हैं प्यासे

गर मय नहीं दे ज़हर ही का जाम बला से

जो कुछ है सो है उस के तग़ाफ़ुल की शिकायत

क़ासिद से है तकरार न झगड़ा है सबा से

दल्लाला ने उम्मीद दिलाई तो है लेकिन

देते नहीं कुछ दिल को तसल्ली ये दिलासे

है वस्ल तो तक़दीर के हाथ ऐ शह-ए-ख़ूबाँ

याँ हैं तो फ़क़त तेरी मोहब्बत के हैं प्यासे

प्यासे तिरे सर-गश्ता हैं जो राह-ए-तलब में

होंटों को वो करते नहीं तर आब-ए-बक़ा से

दर गुज़रे दवा से तो भरोसे पे दुआ के

दर गुज़रें दुआ से भी दुआ है ये ख़ुदा से

इक दर्द हो बस आठ पहर दिल में कि जिस को

तख़फ़ीफ़ दवा से हो न तस्कीन दुआ से

'हाली' दिल-ए-इंसाँ में है गुम दौलत-ए-कौनैन

शर्मिंदा हों क्यूँ ग़ैर के एहसान-ओ-अता से

जब वक़्त पड़े दीजिए दस्तक दर-ए-दिल पर

झुकिए फ़ुक़रा से न झमकिये उमरा से

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts