ख़लिश-ए-तीर-ए-बे-पनाह गई's image
1 min read

ख़लिश-ए-तीर-ए-बे-पनाह गई

Ada JafriAda Jafri
0 Bookmarks 69 Reads0 Likes

ख़लिश-ए-तीर-ए-बे-पनाह गई
लीजिए उन से रस्म-ओ-राह गई

आप ही मरकज़-ए-निगाह रहे
जाने को चार-सू निगाह गई

सामने बे-नक़ाब बैठे हैं
वक़्त-ए-हुस्न-ए-मेहर-ओ-माह गई

उस ने नज़रें उठा के देख लिया
इश्क़ की जुरअत-ए-निगाह गई

इंतिहा-ए-जुनूँ मुबारक-बाद
पुर्सिश-ए-हाल गाह गाह गई

मर मिटे जल्द-बाज़ परवाने
अपनी सी शम्मा तो निबाह गई

दिल में अज़्म-ए-हरम सही लेकिन
उन के कूचे को गर ये राह गई

 

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts