फूलों की आरज़ू में बड़े ज़ख़्म खाये हैं's image
1 min read

फूलों की आरज़ू में बड़े ज़ख़्म खाये हैं

Abdul Hameed AdamAbdul Hameed Adam
0 Bookmarks 54 Reads0 Likes

फूलों की आरज़ू में बड़े ज़ख़्म खाये हैं
लेकिन चमन के ख़ार भी अब तक पराये हैं
उस पर हराम है ग़म-ए-दौराँ की तल्ख़ियाँ
जिसके नसीब में तेरी ज़ुल्फ़ों के साये हैं
महशर में ले गैइ थी तबियत की सादगी
लेकिन बड़े ख़ुलूस से हम लौट आये हैं
आया हूँ याद बाद-ए-फ़ना उनको भी 'अदम
क्या जल्द मेरे सीख पे इमान लाये हैं

 

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts