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बेटी दिवस एक बेटी की नजर से

ZindagiZindagi September 27, 2021
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आज मैं बेटी हूँ

कभी बहू भी बनूगीं.

एक ख्वाईश है मेरी,

रुपयों पैसो से न सही

कर्म कर्तव्य से ही

मैं दोनों का फर्ज निभा सकू.

बड़ी बड़ी बातें न सही

छोटी छोटी खुशियां दे सकू.

इसका उसका तेरा मेरा नहीं

सब कुछ हमारा कर सकू.

समस्या जो कोई आन पड़े,

तो बहू बेटी में, न मैं मापी जाऊं

न परायी रहूं, न पराया कहलायी जाऊं

साथ सबके, मैं शायद न चल सकूं

पर धैर्य इतना हो, कि साथ सबका दे सकूं

मैं बाटूं न मायके ससुराल को कभी,

और सब्र इतना ही हो, कि

दोनों ही परिवार अपना हो.

Pratibha Singh Kuch Ankahe Alfaaz

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