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Deshbhakti Nazm by Rekhta Pataulvi

ZiaZia January 6, 2022
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Deshbhakti Nazm

ख़्वाबों का गुल्सिताँ है तू,अरमानों का चमन

जन्नत से कम नहीं है तू मेरे लिए वतन

इक गीत मैंने लिक्खा है तेरे लिए वतन

ख़्वाबों का गुल्सिताँ है तू,अरमानों का चमन

परबत हिमाला अज़्म का परचम कहें जिसे

गंग-ओ-जमन हैं प्यार का संगम कहें जिसे

झरनों से फूटी है नई उम्मीद की किरन

ख़्वाबों का गुल्सिताँ है तू,अरमानों का चमन

गौतम रहीम नानक और चिश्ती-ओ-कबीर

पैग़ाम लाए प्यार मुहब्बत का सब फ़क़ीर

इंसानियत का सबको सिखाकर गए चलन

ख़्वाबों का गुल्सिताँ है तू,अरमानों का चमन 

बढ़ने ना पाए हिंदू-मुसलमाँ में फ़ासले

सब एक हैं जवाँ हैं अभी अपने हौसले

हां! गुलज़मीन-ए-हिंद पे क़ुर्बान है गगन

ख़्वाबों का गुल्सिताँ है तू,अरमानों का चमन

हम एक हैं हम एक हैं गूंजे वही सदा

अपने वतन पे कर देंगे हम जान-ओ-तन फ़िदा

अपने सरों से बांधके निकले हैं हम कफ़न

ख़्वाबों का गुल्सिताँ है तू,अरमानों का चमन

Rekhta Pataulvi

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