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"जीवन समर"

RohitRohit March 19, 2022
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पतझड़ में झड़े फूल, पत्ते कभी पेड़ों से दूर नही होते, वे अगले बसंत तक खाद बनकर फिर पहुंच जाते हैं पेड़ को ज़िंदा रखने, टहनियों पर लहराने!

यानी वंश एक पेड़ है और उसमें जन्मे लोग पत्ते है, पतझड़ आता है तो लोग इस दुनिया को अलविदा कहते हैं पर पूरी तरह नही, हर किसी में थोड़ा बहुत रह जाते हैं किसी ना किसी तरीके से, लोगों के जाने का शोक इतना ना करो कि वसंत न आ पाये, पेड़ फिर हरे न हो, पत्तियां फिर न आये, टहनियाँ फिर न लहरा सके।
-रोहित

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