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गुजरे जमाने की मीठी याद

RohitRohit March 1, 2022
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अ-गुजरे जमाने की मीठी याद,
खेत जो फिर एक बार
खाली हो गये है
पेड़ जो अब
कटने को तैयार है
मैं जिसने एक सांस भी
याद न किया तुझको
ये फुरसत के लम्हों की बददुआ है
या कोई करिश्मा है कि
तू एक बार फिर
मेरी नफ़स-नफ़स में करवटें ले रही है
मैं जो चुप-चाप रात का संगीत सुन रहा था
कि मेरी खामोशी में
सहसा इक आहट हुई, और
और देखा कि मेरी आँखे जिनमें
जाले पड़ गए थे
कहीं से कोई उजाला आया
कांटो वाले पौधे पर 
गुलाब खिलने लगे हैं
अ-मेरे हमनफ़स
मैं आज तुझसे ये पूछना चाहता हूँ
मैं गर तुझे भूल गया था
ये तेरा ख्याल फिर क्यूँ आया है।
- रोहित

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