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गृहस्थी तुम संपूर्ण संभाले,

ज़िम्मेदारी अनेक तुम्हारे हवाले!

ढ़ालती अक्सर खुदको सबके अनुरूप,

रौनक लाता तुम्हारा तेजस्वी स्वरूप!

बागवानी से सज्जित सुंदर बगीचा,

झांकता नन्हा चेहरा जो खड़ा समीप दरीचा!

सबमें झलकती तुम्हारे प्रेम की तरंग,

जैसे पवन संग उड़ती आशा से लिपटी पतंग!

पोषण देती तुम्हारी करुणा की अदृश्य खुराक़,

जैसे देह से रूह झाकें रखकर नज़रें पाक,

कभी तुम देवी रमा की लगती परछाई,

विद्या से तुम मां सरस्वती कहलाई,

कभी मां पार्वती सा तुम्हारा विदुषी भेष,

वात्सल्य तथा विवेक का प्रचुर समावेश,

समस्त वेदों की जननी जैसे मां गायत्री!

उसी प्रकार शिशु को जगत में लाए जब सशक्त स्त्री,

मां दुर्गा सा उसकी शक्ति का होता प्रवाह,

उपयोगिता अनुसार संसाधनों को करती वो निर्वाह,

उसका कर्तव्य से प्रेरणा देना होता समाज सुधारक,

आत्मबोध से प्रकट होते समक्ष प्रगति के कारक,

खुशियां लगती उसकी प्रार्थनाओं का परिणाम,

ओ गृहणी! तुम्हारी दिव्य शक्तियों को मेरा प्रणाम।।



- यति






Dedicated to every Homemaker ! :)


❤️

Thankyou


Much Love,

Much Light!



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